चार जीवधारियों

परिचय

यहेजकेल अगमवक्ता का पुस्‍तक आश्‍चर्य किसिम के दर्शन से शुरू होता है। उसने स्‍वर्ग खुला हुआ और लहलहाती चमचमाती हुई चमक के बीच में चार जीवधारियों को देखा। वह उन लोगों के निम्‍नअनुसार वर्णन किया है। उन लोगों का मुख एैसा दिखायी देता था। “उनके सामने के मुखों का रूप मनुष्‍य का सा था और उन चारों के दहिनी ओर के मुख सिंह के से, बाई ओर के मुख बैल के से थे, और चारों के पीछे के मुख ऊकाब पंक्षी के से थे” (यहेजकेल १:१०)। यूहन्‍ना ने भी ऐसा दर्शन मिलता जुलता दर्शन देखा, जो प्रकाशित वाक्‍य ४:६-७ में ऐसे उल्‍लेख किया गया है, “और उस सिंहासन के सामने मानो बिल्‍लोर के समान काँच का सा समुद्र है। सिंहासन के बीच में और सिंहासन के चारों ओर चार प्राणी है, जिनके आगे पीछे आँखें ही आँखें है। पहला प्राणी सिंह के समान है, और दूसरा प्राणी बछडे़ के समान है, तीसरे प्राणी का मुँह मनुष्‍य का सा है, और चौथा प्राणी उड़ते हुए ऊकाब के समान है।”

यह दर्शन और चार जीवधारियों का अर्थ क्‍या है तो?

चार मनुष्‍यों में कर उठाने वाला, अज्ञात पेशा करने वाला, वैद्य और मल्‍लाह (जाल डालने वाला) थे, उसने यीशु मसीह का जीवनी लिखा। उन लोगों का नाम मत्ती, मर्कूस, लूका और यूहन्‍ना है। लाखों मनुष्‍य वाद में जा कर बाइबल बोल कर यहूदियों का पवित्र धर्मशास्‍त्र में उन लोगों का लेख जैसा (पौलुस, पतरस, और दूसरो का लेख सहित) सम्‍मिलित कहेगे कभी भी कल्‍पना भी नहीं किया और यह लेख सयौं भाषा में अनुवाद किया जायेगा इसका सपना भी नहीं देखा था। यदि यह विचार का ज्ञान मात्र होता तो शायद वे लोग आश्‍चर्य चकित नहीं होते।

मत्ती, मर्कूस और यूहन्‍ना यहूदी जाति होने के कारण निश्‍चय ही यहेजकेल का दर्शन भी पता था परन्‍तु उन लोगों का लिखा हुआ वह दर्शन की बातों का किस विषय में सम्‍बन्‍धित था यह विषय के बारे में कुछ पता नहीं था। वे लोग अन्‍जान में ही इसके पीछे होने वाली कौन से विषय के भूमिका खेला था। यह चारों प्रकार का सुसमाचार जीवधारियों के प्रति परस्‍पर सहमत है।

मत्ती

मत्ती का सुसमाचार पहला जीवित प्राणी के संग सम्‍बन्‍धित है। भारत के संस्‍कृति और बाइलब में सिंह जानवरों का राजा है उसी अनुरूप मत्ती ने यीशु मसीह को राजा के रूप में देखते है। सिंहासन कहने वाला शब्‍द का अर्थ सिंह का आसन है, बाइबल में सिंह को राजा के समान और यहूदा के कुल संग जोड़ता है, जो कुल से बाद में यीशु मसीह का जन्‍म हुआ। उत्‍पत्ति ४९:९-१० में याकूब ने ऐसे भविष्‍यवाणी किया: “यहूदा सिंह का बच्‍चा है। हे मेरे पुत्र तू अहेर कर के गुफा में गया है, वह सिंह अथवा सिंहनी के समान दब कर बैठ गया फिर कौन उसको छेडे़गा। जब तक शीलों न आए तब तक न यहूदा से राजदण्‍ड छूटेगा, और न उसके वंश से व्‍यवस्‍था देने वाला अलग होगा और राज्‍य-राज्‍य के लोग उसके अधीन हो जायेगे”। मत्ती सरकारी हाकिम था और चार सुसमाचार लेखक के मध्‍य में यीशु मसीह को राजा के रूप में देखने वाला वह सुहाने वाला व्‍यक्ति था।

अब्राहम का पुत्र, दाऊद का पुत्र यीशु मसीह का वंशावली कहने वाला शब्‍द से मत्ती अपने सुसमाचार का शुरूवात करता है। उसके बाद उसने यीशु मसीह के वंश को अब्राहाम से लेकर दाउद तक और इस्राएल के सभी राजाओं के वंश का पता लगाता है। दाऊद के सिंहासन में बैठने के लिये नियुक्त किया हुआ व्‍यक्ति के लिए इस से बढ कर और दूसरी बात सुहावनी और क्‍या हो सकती है? ज्‍योतिषियों के दर्शन के वचनों को मत्ती ने मात्र ऐसे लिखा है: “यहूदीयों का राजा हो कर जन्‍म लिया हुआ वे कहाँ है? हम लोग पूरव में वहाँ का तारा दिखायी दिया और आराधना करने आये हैं” (मत्ती २:२)।

मत्ती के पुस्‍तक के अन्‍त में चेलों को आज्ञा देते समय यीशु मसीह ने ऐसा कहा: “स्‍वर्ग और पृथ्‍वी का अधिकार मुझे दिया गया है” (मत्ती २८:१८)। एैसी भाषा और शक्ति राजा का मात्र हो सकता है।

मर्कूस

मर्कूस दूसरे जीवित प्राणी के साथ सहमत होता है, जो बछड़े के जैसा नौकर का स्‍थान लेता है, उसी अनुरूप यीशु मसीह उसके नौकर के रूप में देखता है जो राजा के ठीक विपरीत है। नौकर लोग अन्‍जान मुनष्‍य होता है। मर्कूस अज्ञात पेशा करने वाला व्‍यक्ति था। कहने मतलब इस बात से मेल खाता है। उनका शुरू का शब्‍द साधारण रूप में ‘यीशु मसीह का सुसमाचार का आरम्‍भ’ होने वाली बात से शुरू होता है। वहां पर कोई वंशावली नहीं है, नहीं वहां वंश का विवरण ही है। यह बात नौकर के लिये सुहावने वाली है मर्कूस ने न तो बहुत शिक्षा का उल्‍लेख किया है। उनके सुसमाचार के बारे में सब सेवा के बारे में उल्‍लेख किया गया है। यीशु मसीह अपने पिता के आज्ञा अनुसार वहां का सेवा किया नौकर के लिए मर्कूस का सुसमाचार सुहाने वाला और दूसरा से छोटा है। मर्कूस के सुसमाचार के अन्‍त में चेलों को आज्ञा देते समय यीशु मसीह ने कहा: “विश्‍वास करने वालों संग यह चिन्‍ह होगा, मेरे नाम से वे लोग भूतात्‍मा को भगायेंगे, वे लोग नयी भाषा बोलेगे, वे लोग सर्पो को पकडे़गे, कोई विषाक्‍त चीज खायेंगे फिर भी कोई हानी नहीं होगी, वे लोग विमारियों के ऊपर हाथ रखेगें और चंगाई पायेगें।” वे दास के द्वारा किया जाने वाला काम के बारे मे बोल रहे थे।

क्‍या एक ही आदमी कैसे राजा और नौकर हो सकता है? वास्‍तव में यह दो भूमिकायें ठीक विपरीत है। और विभिन्‍न देशों में जैसा भारत में राजा देश का संवैधानिक शिर मात्र होगे। प्राचीन समय में राजाऔं वास्‍तविक रूप में अपने देश को शासन चलाते थे और उन लोगों के साथ सम्‍पूर्ण अधिकार होते थे। वे लोग आज का राजा और प्रधानमंत्री जैसे थे परन्‍तु उससे भी ज्‍यादा आज का तानाशाही जैसा था। शमूएल के पुस्‍तक के शुरू के अध्‍याय में इस्राएल का पहला राजा शाऊल को राज्‍यभिषेक का वर्णन करता है। शमूएल ने ‘तुम लोग अपने वहां का दास होगे’ कहने वाला शब्‍द से राजा ने अपने विषय से जोड़ दिया। प्राचीन समय में छोटे-छोटे राजा लोग अपने मन नहीं रूचाने वालों को जो कोई भी हो तुरन्‍त मृत्‍यू दण्‍ड के लिये आज्ञा दे सकते थे और बार बार ऐसा होता था। और दूसरा शब्‍द में कहा जाये तो नौकर जिसको किसी प्रकार का अधिकार नहीं होता, वह अपने मालिक का हर एक इच्‍छा को पालन करना पड़ता है।

यीशु मसीह ने राजा और नौकर दोनो का भूमिका सम्‍पूर्ण रूप से पूरा किया। उन्‍हों ने राजा के जैसा बोलने वाली भाषा और अधिकार ऐसे प्रयोग किया ‘स्‍वर्ग और पृथ्‍वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है।’ और वे नौकर के भाषा मे ऐसे बोले और उसी अनुसार वे अपना जीवन भी जीया: ‘क्‍योंकि मैं अपनी इच्‍छा नहीं वरन अपने भेजने वालो की इच्‍छा पूरी करने के लिये स्‍वर्ग से उतरा हूँ’ (यूहन्‍ना ६:३८)। वे निरन्‍तर रूप से अपने पिता की इच्‍छा पूरा किया।

लूका

तीसरा सुसमाचार के पुस्‍तक का लेखक लूका है। वे तीसरे जीवीत प्राणी मनुष्‍य के साथ सहमत है। वे यीशु मसीह को मनुष्‍य के रूप में देखते है। लूका वैद्य होने के कारण मनुष्‍य से ज्‍यादा सम्‍बन्‍ध था और यीशु मसीह को इस प्रकार से देखना उनके लिये स्‍वाभाविक है। लूका ने मात्र यीशु मसीह के जन्‍म का विस्‍तृत मानवीय विवरण देता है। वहां पर मरियम के यहां स्‍वर्गदूत दिखायी पड़ा और पवित्र आत्‍मा के द्वारा गर्भधारण किया यह विवरण बताते है। लूका ने मात्र बेथलेहेम में पहला और यीशु मसीह पहली बार चरनी में सोये हुये का उल्‍लेख किया है। मत्ती ने जैसा लूका भी यीशु मसीह का वंशावली देता है परन्‍तु भिन्‍न तरीका से। मत्ती ने अब्राहम से शुरू करके दाऊद होते हुये नीचे जाता है और लूका ने मरियम से शुरू करके आदम तक पहुँचता है। लूका ३ अध्‍याय का अन्‍तिम शब्‍दों में, “आदम का पुत्र परमेश्‍वरका पुत्र है” हिब्रू में आदम का अर्थ आदमी / मनुष्‍य होता है। इस कारण इसको हम पुन: अनुवाद करके ‘मनुष्‍य का पुत्र, परमेश्‍वर का पुत्र’ कह सकते है।

यीशु मसीह के जीवन के व्‍यक्तिगत विवरण के लिये हम लूका के प्रति ऋणी है। उसने मात्र भीड़ के द्वारा यीशु मसीह को कैसे अपने शहर नासरत से बाहर निकालने वाली बात को भी बताया। उसने कैसे यीशु मसीह ने गेतसमनी में प्रार्थना करते समय पसीना लहू के बूँद जैसा गिरने लगा इसका भी वर्णन करते है।

लूका ने मात्र अपने सुसमाचार के पुस्‍तक के अन्‍त में हुआ आज्ञा अनुसार ‘यरूशलेम से शुरु करके, सारा जातियों को पश्‍चाताप और पाप मोचन (क्षमा) का प्रचार किया जायेगा’ यह बात को उल्‍लेख किया है। वे सुसमाचार प्रति मनुष्‍य के प्रतिक्रिया ‘पश्‍चाताप और उसका परिणाम स्‍वरूप क्षमा’ प्रति केन्‍द्रित होता है।

यूहन्‍ना

यूहन्‍ना के सुसमाचार के पुस्‍तक चार जीवित प्राणी उड़ने वाले चील साथ सम्‍बन्‍धित है। चील आकाश (अर्थात स्‍वर्ग) में उड़ने वाले पंक्षी होने के कारण, यह परमेश्‍वर का प्रतिनिधित्‍व करता है। यूहन्‍ना ने यीशु मसीह को परमेश्‍वर के रूप में देखता है। और तीन जीवधारियों पृथ्‍वी में चल फिर करने वाले सृष्‍टि है। हम लोग अपेक्षा करने अनुसार यूहन्‍ना का सुसमाचार मत्ती, मर्कूस और लूका के से एकदम अलग प्रकार का है। मत्ती और लूका दोनों में वंशावली ओर सांसारिक जन्‍म का इतिहास उल्‍लेख है परन्‍तु यूहन्‍ना के पुस्‍तक में ऐसा विवरण नहीं है। उनके बदले में उसने ईश्‍वरीय जन्‍म कथा उल्‍लेख किया है। हमें लोगो को यहां पर साधारण तया परन्‍तु प्रत्‍यक्ष और विशिष्‍ट तथ्‍यांक मिलता है: ‘आदि में बचन था, और वचन परमेश्‍वर के साथ था, ओर वचन परमेश्‍वर था’ (यूहन्‍ना १:१)। इसके साथ हम पाते है कि ‘वचन देहधारी हुआ, और अनुग्रह और सत्‍यता से पूर्ण होकर हमारे बीच में समय बिताया। हम लोगों ने उनकी महिमा को देखा जो महिमा पिता के द्वारा आया हुआ एक मात्र पुत्र के जैसा था’ (यूहन्‍ना १:१४)। लूका में मानवीय जन्‍म के इतिहास का वर्णन किया है तो यूहन्‍ना में ईश्‍वरीय जन्‍म के इतिहास का वर्णन किया गया है। यूहन्‍ना मे ‘मै हूँ’ परमेश्‍वर के नाम का सुसमाचार है। यूहन्‍ना ने मात्र यीशु मसीह को ‘मै हूँ’ वाली बात पर बहुत बड़ा दावा लिखा हुआ है। जैसा ‘जीवन की रोटी मै हूँ ’(यूहन्‍ना ६:३५), ‘संसार की ज्‍योति मैं हूँ’ (यूहन्‍ना ८:१२), ‘द्वार मै ही हूँ’ (यूहन्‍ना १०:९), ‘अच्‍छा चरवाह मैं हूँ ’(यूहन्‍ना १०:११), ‘सच्‍ची दाखलता मै हूँ’ (यूहन्‍ना १५:१), ‘अब्राहम से पहले मैं हूँ’ (यूहन्‍ना ८:५८)। ऐसी बातों का दावा और दूसरा कोई कर नहीं सकता परन्‍तु परमेश्‍वर मात्र कर सकता है या कह सकता है। कोई भी धर्मगुरु या नेता ने अभी तक एैसी बातें नहीं बोला है।

यीशु मसीह ने कभी भी अपने आप को परमेश्‍वर नहीं कहा, परन्‍तु ग्रीक (युनानी) भाषा में यूहन्‍ना के सुसमाचार में उन्‍हो ने २१ बार ‘मै हूँ’ बोल कर कहा है। शताब्‍दियों पहले मूसा ने परमेश्‍वर से पूछा, ‘आप का नाम क्‍या है?’ उत्तर में परमेश्‍वर ने कहा, ‘मैं जो हूँ, सो हूँ’ (निर्गमन ३:१४) कहने वाला प्रसिद्ध शब्‍द मिला। यहूदियों के लिए ‘मैं हूँ’ कहा जाने वाला शब्‍द ईश्‍वरीय नाम का एक था। इसीकारण यहूदियों के लिए यीशु मसीह ‘ईश्‍वरीय दावा’ परमेश्‍वर के लिये किया गया ठहरा। यहूदी लोग उनको मारने के लिये पत्‍थर उठाया। मूसा के व्‍यवस्‍था में पत्‍थर चला कर मारने का चलन ईश्‍वर निन्‍दा का सजाय था।

सुसमाचार के अन्‍त में यूहन्‍ना ने थोमा के शब्‍दों को दोहोराया: ‘हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्‍वर’ (यूहन्‍ना २०:२८)। बिना विरोध यीशु मसीह ने यह बात स्‍वीकार किया।

यूहन्‍ना के पुस्‍तक के अन्‍त में हम पाते है कि यीशु मसीह ने फिर उनसे कहा, ‘तुम्‍हे शान्‍ति मिले, जैसा पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्‍हे भेजता हूं’, “पवित्र आत्‍मा लो”, जिनके पाप तुम क्षमा करो, वे उनके लिये क्षमा किए गये हैं, जिनके तुम रखो वे रखे गये है।” लूका के सुसमाचार जैसा यूहन्‍ना के सुसमाचार ने भी पाप क्षमा का समावेश किया गया है। परन्‍तु उसी समय चेलों ने सच ही पाप क्षमा करने वाला शक्ति प्राप्‍त किया। फरीसीयों और व्‍यवस्‍था के गुरुओं के लिये यह बात ईश्‍वर-निन्‍दा था। “यह ईश्‍वर का निन्‍दा करने वाला मनुष्‍य कौन है कहकर दूसरे समय में उन लोगों ने कहा, “परमेश्‍वर को छोड़ और कौन पापों को क्षमा कर सकता है?” एक अर्थ में उन लोगों का कहना ठीक ही था। परमेश्‍वर ही केवल पाप क्षमा कर सकता है। परन्‍तु परमेश्‍वर ही मनुष्‍य के रूप में जीने वाली बात उन लोगों के समझ से बाहर था।

कैसी विपरीत की बातें- राजा, नौकर, मनुष्‍य और परमेश्‍वर! ऐसा आश्‍चर्य और उदेक की बात मनुष्‍य के कल्‍पना से बहुत ऊँची की बात है। क्‍या इतिहास में कोई ऐसा व्‍यक्ति है जो ऐसी विपरीत बातों को एक साथ जोड़ सकता है? हाँ, है, यीशु मसीह तो ऐसा था और है। एक ही व्‍यक्ति नौकर, राजा, मनुष्‍य और परमेश्‍वर!

यीशु मसीह के शरीर का दर्शन

हम लोग यथा उचित रूप में ऊपर की बातों से निष्‍कर्ष ऐसे निकाल सकते कि यहेजकेल अगमवक्ता और प्रकाशितवाक्‍य के पुस्‍तक में यूहन्‍ना ने यीशु मसीह के चार अलग-अलग रूप में दर्शन देखा था कह कर हम अच्‍छी तरह से समझ सकते है। धर्मशास्‍त्र में हुआ आश्‍चर्यजनक नमूना के दृष्‍टि के साथ सन्‍तुष्‍ट हो कर अच्‍छे उदेक के मुक्तिदाता के व्‍यक्तित्‍व के ऊपर उन लोगों ने रखा हुआ स्‍वच्‍छ प्रकाश में खुशियाली साथ आनन्‍दित होकर हम अपना अध्‍ययन को यहीं बन्‍द कर सकते थे। निसन्‍देह बहुत व्‍यक्ति कुछ सीमा तक तो देखता है परन्‍तु उससे आगे नहीं देख सके है।

परन्‍तु यहेजकेल ने एक केवल नहीं वह चार जीवधारियों को देखा। और वह चारों सिद्ध और एकता में चल रहे थे। यूहन्‍ना ने चार जीवधारियों को सिंहासन के बीच में और आसपास देखा। क्‍यों सिंहासन मे मात्र सीमित नहीं हुआ? उसका उत्तर ऐसा था: वह दर्शन यीशु मसीह का मात्र नहीं था परन्‍तु यीशु मसीह का सम्‍पूर्ण शरीर (कलीसिया) का दर्शन था। यहेजकेल और यूहन्‍ना ने सामान्‍यत: यीशु मसीह को मात्र नहीं देख रहे थे, परन्‍तु उनका स्‍वरूप परिवर्तन होते हुए और वहां के गुणों का सहभागी स्‍त्री और पुरुषों को भी देख रहे थे। वह जीवधारियों यीशु मसीह के जैसा ही सिद्ध हुआ मनुष्‍यों का प्रतिनिधित्‍व कर रहे थे। यह कैसा आश्‍चर्यजनक सुसमाचार है? एक ही व्‍यक्ति नौकर, राजा, मनुष्‍य और परमेश्‍वर हो कर २,०००० वर्ष पहले इस संसार में आया। यहाँ पर रखा हुआ समाचार यह है कि अनगिनती व्‍यक्ति, राजा, नौकर और परमेश्‍वर होने से पहले ही जन्‍म होने में वे प्रथम है, जो यह सुसमाचार के भीतर का सुमाचार है।

हम लोग उनके साथ राज्‍य करने वाले व्‍यक्ति लोग है। हम लोग परमेश्‍वर का और मनुष्‍य का सेवक और सेविका है। हम लोग मनुष्‍य ही है तथापि परमेश्‍वर का सन्‍तान और ‘स्‍वर्गीय स्‍वभाव का सहभागी’ भी हैं।

हमारे मुक्तिदाता में उपस्‍थित किया हुआ पवित्र आत्‍मा ने ही उनको राजा, नौकर, मनुष्‍य और परमेश्‍वर बनाया। अभी हमारे भीतर रहने वाला पवित्र आत्‍मा ही हमको राजकीय शक्ति और अधिकार देते है और हम लोगों को सेवक होने में नम्र स्‍वभाव और सेवा करने में ईश्‍वरीय शक्ति देते है।

पवित्र आत्‍मा के द्वारा ही हम लोग परमेश्‍वर के स्‍वभाव को प्रकट करते है। अब हम यह चार जीवधारियों को और नजदीक से अवलोकन करेगें और पवित्र आत्‍मा के सहायता द्वारा यीशु मसीह के शरीर (कलीसिया) में प्रकट होने वाली महिमा की कुछ बातों को देखेंगे। यहेजकेल और यूहन्‍ना के दर्शन से हम लोगों को नया परिवर्तन करने में आत्‍मिक प्रकाश मिले।

राजाओं

यीशु मसीह राजाओं का राजा और महाराजा थे और है। पौलुस ने उनको जो परमधन्‍य और एक मात्र अधिपति और ‘राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु है’ कह कर वर्णन करता है (१ तिमुथियुस ६:१५)। यूहन्‍ना ने भी उनको ‘क्‍योंकि वह प्रभुओं का प्रभु और राजाओं का राजा है’ कह कर वर्णन करता है (प्रकाशितवाक्‍य १७:१४)। उनके बस्‍त्र और जांघ पर यह नाम लिखा है: ‘राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु’ (प्रकाशितवाक्‍य १९:१६)। पहले अथवा पुराने समय में बेबीलोन और फारस के राजाओं का पदवी ‘राजाओं का राजा’ होते थे। यह विशेष सम्‍बोधन बेबीलोन के राजा नबूकनदेसर (यहेजकेल २६:७, दानिय्‍येल २:३७) और फारस का राजा अर्तक्षत (एज्रा ७:१२) के लिये प्रयोग किया जाता था। यह महाराजा लोग बड़े साम्राज्‍य के भीतर रहने वाले छोटे राजाओं के ऊपर शासन करते थे। छोटे छोटे राजाओं ने अपने-अपने देश में शासन करते थे। फिर भी वहा निम्‍न स्‍तर के राजाओं को हर हमेशा सम्‍पूर्ण साम्राज्‍य का महान केन्‍द्रीय राजा के अधीन में रहते थे और उनके ही ऊपर निर्भर रहते थे।

यह यीशु मसीह के शरीर का चित्र है। यीशु मसीह राजाओं का महाराजा है और वहाँ के शरीर (कलीसिया) का हर एक सदस्‍य उनके नीचे का छोटा राजा है। और हर एक सदस्‍य राजा के शक्ति और अधिकार प्राप्‍त करने के लिये नियुक्त किया गया है। ऐसा हुआ तो राजा होने का मतलब क्‍या है तो? इसके लिये फिर हम लोगों को यीशु मसीह को ही देखना पड़ता है। वे किस प्रकार का राजा थे? प्राचीन राजा के जैसा उनके साथ भी सम्‍पूर्ण शक्ति था, उनकी प्रत्‍येक इच्‍छा और आज्ञापालन किया जाता था, और हर एक मनुष्‍य और हर एक चीज उनके अधीन था। प्राचीन राजाओं जैसा नहीं करके वे अपनी शक्ति दूसरो के भलाई के लिये प्रयोग मात्र किया, और वह राजा जैसा नहीं करके वे अपने स्‍वेच्‍छा अनुसार दूसरों को अपना शक्ति प्रदान किया।

अपने सार्वजनिक सेवकाई के प्रारम्‍भ करने से पहले यीशु मसीह ने अपने ही शरीर के ऊपर ही पूर्ण अधिकार का प्रदर्शन किया। मत्ती के पुस्‍तक में लिखा गया है: “वह चालीस दिन और चालीस रात निराहार रहा, तब उसे भूख लगी” (मत्ती ४:२)। चालीस दिन के अन्‍तिम में मात्र यीशु मसीह को भूख लगी, चालीस दिन के अवधि तक यीशु मसीह को खाने की चीजो का कुछ भी रुचि नहीं दिखायी देता है। सच्‍चा भूख का पीड़ा उस समय होता है, जब शरीर में रहा हुआ सब चर्बी का प्रयोग कर चुके होते है। स्‍वभाविक से जिसको हम ‘भूख’ कहते है, वह हमारे शरीर के दैनिक रूप में लेने वाला भोजन के मात्रा को मांगने से ज्‍यादा और कुछ भी नहीं है। जब यीशु भूख लगी हुई चरम सीमा में पहुंचे फिर, भी वे खाना खाने के मौका को अस्‍वीकार किया। जितना भी ज्‍यादा भूख लगने से भी वे कुछ भी शारीरिक भूख के लिये रुची नहीं किया अथवा स्‍वीकार नहीं किया। शायद उस समय में वे भूख से आने वाला मृत्‍यू का सामन किया होगा। परन्‍तु फिर अभी तक वे अपने शरीर का मालिक हो कर रह रहे थे।

यीशु मसीह के साथ शैतान के ऊपर भी अधिकार था। उनके उपवास के बाद शैतान को अपने नजदीक से भगाने का आज्ञा देने के योग्‍य हुये। उनके सेवकाई के समय तक आत्‍मिक क्षेत्र उनके पूर्ण नियन्‍त्रण में था। यीशु मसीह को अपने ऊपर सब अधिकार था और वे अपने चेलों में भी यह अधिकार होना पड़ेगा यह स्‍पष्‍ट किया। मत्ती १०:१ में हम पढ़ते है कि ‘फिर उसने अपने बारह चेलो को पास बुलाकर, उन्‍हें अशुद्ध आत्‍माओं पर अधिकार दिया कि उन्‍हें निकाले और सब प्रकार की बीमारियों और सब प्रकार की दुर्बलताओं को दूर करे।’ लूका के पुस्‍तक में उन्‍हों ने कहा, ‘मै शैतान को बिजली के समान स्‍वर्ग से गिरा हुआ देख रहा था, देखो मैने तुम्‍हें सांपों और बिच्‍छुओं को रौदने का, और शत्रु की सारी सामथ्‍ र्य पर अधिकार दिया है, और किसी वस्‍तु से तुम्‍हें कुछ हानी न होगी’ (लूका १०:१८-१९)।

रोगों के ऊपर भी यीशु मसीह का अधिकार था “जब संध्या हुई तब वे उसके पास बहुत से लोगोंको लाए जिन में दुष्‍टात्क़ाएं यीं और उस ने उन आत्क़ाओं को अपके वचन से निकाल दिया, और सब बीमारोंको चंगा किया।” (मत्ती ८: १६)।

कोई भी रोग उनके आगे नहीं रह सकता है वे आज्ञा दिया और रोगी लोग चंगाई पाया। यह अधिकार यीशु मसीह के लिये मात्र नहीं था, वे अपने चेलो को भी यह अधिकार दिया, “सांपों को उठा लेंगें, और यदि वे प्राणनाशक वस्‍तु भी पी जाये तो भी उनकी कुछ हानि न होगी, वे बीमारों पर हाथ रखेंगे, और वे चंगे हो जायेंगे” (मर्कूस १६:१८)।

प्राकृतिक तत्‍वों के ऊपर का नियन्‍त्रण द्वारा यीशु मसीह चेलों को आश्‍चर्य चकित किया। ‘यह कैसा मनुष्‍य है? क्‍योंकि आँधी और पानी भी उसकी आज्ञा मानते है ’ (मत्ती ८:२७)। इस बात में भी धर्मशास्‍त्र में वे अकेले थे। शताब्‍दियों पहले एलिया ने ३ वर्ष तक सूखा पडने के लिये आज्ञा किया और फिर पानी पड़ने के लिये आज्ञा किया और आकाश कि खिड़िकिया खुली और पानी पड़ने लगा। यीशु मसीह के साथ नाव नहीं होने समय वे पानी के ऊपर चलने लगे, जब तक पतरस में विश्‍वास था उसने भी वैसा कर सका। खाने वाली चीज थोड़ा होने के समय पांच रोटी और दो मछली से हजारों मनुष्‍यों को खिलाया परन्‍तु यह भी दूसरों के हाथ के द्वारा ही किया।

आश्‍चर्य चकित करने वाली बात क्‍या है कि एक प्रकार का अधिकार यीशु मसीह के जीवन में कम मात्र दिखायी दिया, वह क्‍या है कि मनुष्‍य के ऊपर अधिकार प्रयोग किया हुआ हम नहीं देखते, वे सांसारिक राजा जैसे ही थे, उन्‍हों ने स्‍पष्‍ट के साथ कहा कि उनका राज्‍य इस संसार का नहीं है। उनका परीक्षा होते समय शैतान ने एक बार दण्‍डवत करने से यह सारा संसार सारा राज्‍य देने के लिये प्रस्‍ताव रखा था, यीशु मसीह ने उसको अस्‍वीकार किया। यह वहां के पिता की योजना वा इच्‍छा नहीं था। उनका योजना तो मनुष्‍यों को अपनी ही इच्‍छा से वहां के प्रति समर्पित होने वाले हृदय में शासन करना था। बल प्रयोग उन लोगो के शरीर के ऊपर अधिकार करने के लिये नहीं । उनके शत्रु लोग अपने पांव नहीं पड़ने तक यीशु मसीह शासन करेंगे। परन्‍तु उनका पाँव का कहने का मतलव क्‍या है तो? वे लोग शरीर का अँग है। मनुष्‍य पैदा होते समय सब से पीछे निकलने वाला अँग पाँव ही है, जो विजय होने और राज्‍य करने वालों के अर्थ का संकेत देता है।

यीशु मसीह वे अपना सब राजकीय अधिकार अपने चेलों को दिया। पहले ही से दोहराया हुआ पदों के साथ-साथ हम निम्‍नलिखित पदों को भी पढ़ सकते हैं: “मैं तुमसे सच सच कहता हूं कि जो मुझ पर विश्‍वास रखता है। ये काम जो मैं करता हूँ वह भी करेगा,वरना इनसे भी बड़े काम करेगा, क्‍योकिं मैं पिता के पास जाता हूँ।” यीशु ने फिर उनसे कहा, “तुम्‍हे शान्‍ति मिले: जैसे पिताने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्‍हें भेजता हूँ” (यूहन्‍ना २०:२१)। बहुत दिनों के बाद यूहन्‍ना ने लिखा, “इसी से प्रेम हम में सिद्ध हूआ कि हमें न्‍याय के दिन हियाव हो, क्‍योंकि जैसा वह हैं वैसे ही संसार में हम भी हैं” (१ यूहन्‍ना ४:१७)। प्रकाशितवाक्‍य ३:२१ में हमलोग यह शब्‍द पढ्‍ते हैं, “जो जय पाये मैं उसे अपने साथ अपने सिंहासन पर बैठाउंगा, जैसे मैं भी जय पा कर अपने पिता के साथ उनके सिंहासन पर बैठ गया।”

संसार मे राजा लोग नौकर नहीं होते और नौकर राजा नहीं होते। सांसारिक राजा लोग शासक लोग तो अपने ही भोग बिलास और फाइदा के लिये शासन करते हैं। बहुत से लोग तो अपने अधीन में हुये लोगों को बयान नहीं कर सकने वाला दु:ख,कष्‍ट दिये हैं। हम लोग तो कुछ दिन पहले मात्र एक शताब्‍दी पार किये हैं। उस समय मैं निर्दयी और कूर शासक लोग लाखों को मृत्‍यू तक पीड़ा यातना दे कर मारा। हिटलर, स्‍टालिन और दूसरे लोगों का उन लोगों से बढ़ कर पहले का कठोर और निर्दयता के गहराई में पहुंचा हजारों र्निदोष मनुष्‍य की घात करने वाले आगे है।

परमेश्‍वरका राज्‍य शासकों असीम रूप में उन लोगों से अलग होंगे उसके आधार में वह लोग परमेश्‍वर के इच्‍छा अनुसार काम करके दूसरों का दास दासी होंगे। क्‍योंकि यीशु मसीह में उनके पिता के पूर्ण आज्ञाकारिता के आधार में राजा में होने वाला पूर्ण अधिकार था। इसीलिए उनके पीछे चलने वाले में भी यह अधिकार होना पड़ता है। वे लोग भी पूर्ण आज्ञाकारिता में अपने स्‍वर्गीय पिता की इच्‍छा में काम करना पडता है और ऐसे वे लोग उनके जेष्‍ठ पुत्र के साथ सिंहासन के साझेदार होने के योग्‍य होगे।

नौकरों

मैने कहा जैसा प्राचीन समय में नौकर कहलाने वाला राजा के ठीक विपरीत था। राजा के साथ पूर्ण अधिकार और शक्ति होता था तो नौकर तो केवल दास ओर अपने मालिक के सम्‍पत्ति के बराबर होने से बढ़कर और कुछ नहीं थे और न ही उसका अधिकार कुछ कहलाने वाला था। उनको अपने मालिक की इच्‍छा पूरा करना ही उसका कर्तव्‍य था। उन दिनों मे मानव अधिकार का कुछ भी व्‍यवस्‍था नहीं था।

यीशु मसीह अपने पिता के सिद्ध सेवक थे। उन्‍हों ने कहा, “क्‍योंकि मैं अपनी इच्‍छा नहीं वरन् अपने भेजने वाले की इच्‍छा पूरी करने के लिये स्‍वर्ग से उतरा हूँ” (यूहन्‍ना ६:३८)। जैसे प्राचीन समय में नौकर लोग अपने सांसारिक मालिक का इच्‍छा पालन करने के लिये दिन में चौबीसौं घण्‍टा हाजीर होते थे, ठीक उसी प्रकार यीशु मसीह की हर एक क्षण अपने स्‍वर्गीय पिता की आज्ञा पालन करते थे। वे अपने ही स्‍वाभाविक इच्‍छा और आकांक्षाओं में चलने की ओर अधीन पड़ने वाले नहीं थे बल्‍कि वे अपने पिता के इच्‍छा और वहां के सब विचार, वचन और काम के ऊपर शासन किया था।

प्राचीन काल में नौकर लोग बाध्‍यता से अपने मालिक का सेवा करते थे और उन लोगों के लिये कोई विकल्‍प नहीं था। वे लोग अपना सारा समय अपने मालिक का सेवा करके समय बिताना चाहते थे। वे लोग अपने इच्‍छा अनुसार जीने के लिये मन होता था, परन्‍तु दुःख की बात उन लोगों को एैसा कोई अधिकार नहीं था।

यीशु मसीह ने अपने ही इच्‍छा के द्वारा अपने पिता की सेवा किया। वे अपने पिता की इच्‍छा पालन करने के लिये खुशी और हर्षित होते थे। उनके लिये यह कोई समस्‍या नहीं था, क्‍योंकि हर एक अवस्‍था में वहां अपने इच्‍छा और उद्देश्‍य अपने पिता के जैसा ही था।

पिता की सेवा करना ही उनके सँगी साथियों को सेवा करने का जग था। आश्‍चर्य लगने वाली बात यह है कि सृष्‍टिकर्ता परमेश्‍वर के हृदय में अपने ही सृष्‍टि की सेवा किया हुआ जैसा उनके पुत्र के हृदय में भी था। यीशु मसीह ने अपने चेलों के पैर धो कर सेवक के हृदय में होने वाला असल गुण को सुन्‍दर प्रकार से प्रमाणित किया।

उन्‍हों ने अपने चेलों को एक दूसरों को पैरों को धो कर सेवा करने के लिये निर्देशन दिया। उनका जीवन अपने चेलों के लिये उदाहरण अथवा नमूना था। उन्‍हों ने अपने चेलों से कहा, “यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे” (यूहन्‍ना १४:१५)।

पौलुस प्रेरित ने बहुत से पत्रों में अपन पाठकों के प्रति अपने आप को ख्रीष्‍ट यीशु का नौकर अथवा दास बोल कर परिचय दिया है। उन्‍होंने अपने आप को प्रेरित कह कर परिचय दिया। परन्‍तु प्रेरित का मौलिक अर्थ नौकर से बढ्‍कर ज्‍यादा अन्‍तर है। इसका अर्थ ‘पठाया हुआ’ होता है। पतरस, याकूब, और यहूदा ने भी अपने पाठकों को अपने आप को यीशु मसीह का दास लोग कह कर परिचय दिया है।

स्‍वभाव से हम लोग अपने स्‍वेच्‍छा से परमेश्‍वर का काम करने वाला नौकर नहीं है। हम लोगो के सब अपने क्रियाकलाप और अपने ही इच्‍छा और आकंक्षा के पीछे चलते है। हम लोग अपने लालच और रुचि का दास लोग है। यीशु मसीह ने ऐसे यह बात को समझाया: “मैं तुमसे सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है वह पाप का दास है” (यूहन्‍ना ८:३४)।

हम कैसे यीशु मसीह का विश्‍वासयोग्‍य नौकर बन सकते है? हम लोग अपना संघर्ष, कोशिश और इच्‍छा के बल के द्वारा कभी भी असल बन नहीं सकते है। यीशु मसीह अपने अनुयायियों को सेवा माँग करने वाले कठोर मालिक नहीं है। मत्ती ११:२८ में यीशु मसीह ने कहा, “मेरा जुआ सहज और मेरा बोझ हलका है।” उनका जुआ सहज औ बोझ हलका है क्‍योंकि हम उनकी इच्‍छा का पालन करते है। जैसे यीशु मसीह ने अपने पिता के साथ एक थे और उनका इच्‍छा पालन करने मे खुशी थे, उसी प्रकार हम भी उनके साथ एक होते है, और उनका इच्‍छा पालन करने में खुशी होते है तो हम आन्‍तरिक परिवर्तन तथा हृदय के परिवर्तन द्वारा अवश्‍य वहां के साथ बनेंगे।

यूहन्‍ना १५:१५ मे यीशु ने अपने चेलों के द्वारा नौकर की उपाधि को हटाया। उन्‍हों ने कहा, “अब से मै तुम्‍हे दास न कहूंगा, क्‍योंकि दास नहीं जानता कि उसका स्‍वामी क्‍या करता है, परन्‍तु मै ने तुम्‍हें मित्र कहा है, क्‍योंकि मैने जो बाते अपने पिता से सुनी, वे सब तुम्‍हें बतादी।” जब हम उनके साथ एक हुये होते है तब साधारण जीवन में अपने खुशी और इच्‍छा अनुसार का काम करते रहते है और आश्‍चर्य रूप में और उदेक प्रकार से हम वहाँ को खुशी करने का काम करते है। पूर्ण स्‍वतन्‍त्रता में हम लोग वही काम करते रहते है और इस प्रकार से हम अपने आप को वहाँ का सेवा करते हुये पाते है।

मनुष्‍य

यीशु मसीह मे परमेश्‍वर ने अपने आप को एक मनुष्‍य के रूप में प्रकट किया। यीशु मसीह इस संसार में आने से पहले वे दूसरे ही तरीके से अपने को प्रकट किया था। पुराने व्‍यवस्‍था के नियम और विधियों मे ईश्‍वरीय सत्‍यता के छाया मात्र था। प्राचीन पुजारीयों ने भी परमेश्‍वर को प्रकट किया परन्‍तु अस्‍पष्‍ट रूप में। जिसके साथ धर्मशास्‍त्र था केवल वे लोग समझ सके। उन लोगों ने धर्मशास्‍त्र से परमेश्‍वर को प्रकट किया था। यीशु मसीह अपने आप को संसार में मनुष्‍य के रूप में परमेश्‍वर को प्रकट होने से पहले हुआ दर्शन से बहुत पहले चले गये।

वे ही परमेश्‍वर का सिद्ध प्रकाश थे, परन्‍तु उनमें कुछ सीमा भी था। वे अपने आप यह कहा: “मुझे तो एक बपतिस्‍मा लेना है, और जब तक वह न हो ले तब तक मै कैसी व्‍यवस्‍था में रहूंगा?” (लूका १२:५०)। जब वे पृथ्‍वी में मनुष्‍य के रूप में आये वे सीमीत होने वाली बातों को स्‍वीकार किया।

वे मनुष्‍य के शरीर में सीमीत थे और एक प्रकार का व्‍यक्ति मात्र हो सके। वे पुरुष थे और पुरुष और स्‍त्री दोनो नहीं हो सके। वे यहूदी थे परन्‍तु भारतीय, नेपाली, चीनीया, अमेरिकी, अफ्रिकी या और कोई जाति के नहीं हो सके। वे सिकर्मी के रूप में आये परन्‍तु मल्‍लाह, किसान, खिलाडी, संगीतकार और मनुष्‍य जाति में पाने वाला और हजारों पेशा वाले जैसा बन नहीं सके। उनका उम्र ३३ वर्ष का था फिर भी पिता, और पति नहीं बने। वे परमेश्‍वर को एक ही व्‍यक्तित्‍व में व्‍यक्त किया- पुरुष, यहूदी, सिकर्मी और घुमफिर करने वाला प्रचारक मात्र। उनके मण्‍डली में मनुष्‍य के सब प्रकार के जाति के रूप में, हर एक उम्र वालों में, हर एक पेशा में, हर एक शारीरिक स्‍वरूप मे यीशु मसीह प्रकट हुये देखने पाना विचित्र और आनन्‍दित और सुन्‍दर बात है।

पूरा सफेद ज्‍योति में विभिन्‍न प्रकार के रंगो को एक मिलाया हुआ होता है। जब यीशु मसीह के शरीर के सदस्‍यों का विभिन्‍न रंग मिला हुआ ज्‍योति इकट्‍ठा होता है तब वे लोग परमेश्‍वर का सम्‍पूर्ण चमकती हुई ज्‍योति उत्‍पादन करेंगे।

दूसरे धर्मों में जैसा पुराना नियम में भी थोड़े ही मनुष्‍य मात्र पूजारी हो सकते थे। वे लोग लेवीयों कुल का ३० से ५० वर्ष तक के उम्र के बीच पुरुष मात्र हो सकते थे। स्‍त्री, जवान, वृद्ध और दूसरे जातियों को समावेश नहीं करते थे।

यीशु मसीह का सच्‍चा शरीर प्रकट होते समय वे पूर्ण मनुष्‍य ही थे। मनुष्‍य जाति का सब प्रकार का सदस्‍यों उसमें होंगे जिसके द्वारा यीशु मसीह का पूरा शरीर निर्माण होगा।

देवों

अब हम हमारे अध्‍ययन के चौथे तथा और भी आश्‍चर्य चकित करने वाले भाग की तरफ बढ़ रहे है। और तीन सुसमाचार से अलग यहून्‍ना का सुसमाचार ने यीशु मसीह को फरक प्रकार से अर्थात परमेश्‍वर के रूप में प्रकट करता है।

हम पहले कह चुके है जैसा यूहन्‍ना ऐसे कहता है: ‘वचन परमेश्‍वर था’। उसने थोमा के स्‍वीकार को भी दोहराते है: ‘मेरा प्रभु और मेरा परमेश्‍वर।’ यीशु मसीह ने प्रयोग किया हुआ ‘मै हूं’ कहने वाला स्‍वर्गीय नाम को भी उसने २१ वार विवरण दिया है। फरीसियों ने उनको दावा करने वाला ईश्‍वर निन्‍दा समझ कर दो बार पत्‍थर वार करने का प्रयास किया हुई बात उसने लिखा है। यूहन्‍ना को सुसमाचार में यीशु मसीह को परमेश्‍वर के रूप में प्रस्‍तुत किया है। नया नियम का दूसरे लेखकों ने भी परमेश्‍वर के रूप मे देखा, जैसे: पौलुस ने लिखा है: “इसमे सन्‍देह नहीं कि भक्‍ति का भेद गम्‍भीर है, अर्थात वह जो शरीर में प्रकट हुआ, आत्‍मा में घर्मी ठहरा, स्‍वर्गदूतों को दिखाइ दिया, अन्‍य जातियों में उसका प्रचार हुआ, जगतमें उस पर विश्‍वास किया गया, और महिमा में ऊपर उठाया गया” (१ तिमुथियुस ३:१६) इब्रानियों के पुस्‍तक के लेखक ने लिखा है: “वह उसकी महिमा का प्रकाश और उसके तत्‍व की छाप है, और सब वस्‍तुओं को अपनी सामथ्‍ र्य के वचन से संभालता है। वह पापों को धोकर ऊंचे स्‍थानो पर महामहिमन्‌ का दाहिने जा बैठा” (इव्रानियों १:३)

क्‍या यूहन्‍ना का सुसमाचार मे यीशु मसीह के परमेश्‍वर और उनके पीछे चलने वाले मनुष्‍य जैसा लाँधने नहीं सकने वाला गढ़्ढा अथवा मिलने वाला अन्‍तर बनाया है? क्‍या नया नियम का सन्‍देह यही है? शताब्‍दियों से ले कर कितने कलीसियो में यही बात सींखा रहें है।

क्‍या यीशु मसीह अपने आप को अपने चेंलो से अलग जाति और तह को दिखाया है? अब फिर हम लोग उनके वचन को देखेंगे। यीशु ने कहा, "मैं और पिता एक हैं" (युहन्‍ना १०:३०) यहूदी लोग उनको मारने के लिये पत्‍थर उठा कर उसका प्रतिक्रिया दिखाया ।

यीशु मसीह ने कहा, “मैंने तुम्‍हें अपने पिता की ओर से वहुत से भले काम दिखाया हैं; उनमें से किस काम के लिये तुम मुझ पर पथराव करते हो?” यहूदियों ने उनको उत्तर दिया, “भले काम के लिये हम तुझ पर पथराव नहीं करते परन्‍तु परमेश्‍वर की निन्‍दा करने के कारण; और इसलिये कि तू मनूष्‍य हो कर अपने आप को परमेश्‍वर बनाता है” (यूहन्‍ना १०:३१-३३)।

फरीसीयों को सब से चोट लगने वाली बात यह थी की- “मैं और पिता एक हैं।” उन लोगो ने यह वचन का दावा करने वाला ईश्‍वर-निन्‍दा के रूप में लिया था। यीशु मसीह ने केवल अपने लिए मात्र यह दावा नहीं किया, उन्‍होंने चेलों के लिए प्राथना किया (आने वाले यूग में विश्‍वास करने वाले सभी लोगो के लिये) कि वे सब एक हो, जैसा तू है, और मैं तुझ में हूँ, वैसे ही वे भी हम में हो, जिससे संसार विश्‍वास करे कि तू ही ने मुझे भेजा है (यूहन्‍ना १७:२१)। पिता के साथ का एकता वे अपने लिये सुरक्षित रखे हुये थे एैसी कोई बात नहीं थी। उनके पीछे चलने वाले अनुयायी भी वह एकता को जान सके और अनुभव कर सके यह कह कर उन्‍होंने प्रार्थना भी किया।

यीशु मसीह ने जो प्रार्थना किया, वह कभी भी उनकी इच्‍छा मात्र नहीं था, वे हमेशा अपने पिता की इच्‍छा के अनुसार प्रार्थना किया और अन्‍त में जा कर वे किये हुये सभी प्रार्थना का उत्तर दिया। जिस चीज के लिये वे प्रार्थना किये वह पूरा होना निश्‍चित था। उन्‍होंने प्रार्थना किया कि उनके चेलों और वे और उनके पिता के साथ एक हो। हम लोग यह निश्‍चय हो सकता है यह कह सकते है कि उनके चेलों और वे उनके पिता के साथ एक होंगे।

फरीसियों ने यीशु मसीह को ईश्‍वर-निन्‍दा का आरोप लगाते समय यीशु मसीह ने उन लोगों को कैसा जवाब दिया? यीशु मसीह ने उन लोगों को ऐसा उत्तर दिया: “क्‍या तुम्‍हारी व्‍यवस्‍था में नहीं लिखा है: मैने कहा तुम ईश्‍वर हो? यदि उसने उन्‍हें ईश्‍वर कहा जिनके पास परमेश्‍वर का वचन पहुंचा (और पवित्र शास्‍त्र की बात असत्‍य नहीं हो सकती), तो जिसे पिता ने पवित्र ठहरा कर जगत में भेजा है, तुम उससे कहते हो, ‘तू निन्‍दा करता है’, इसलिये कि मैने कहा ‘मैं परमेश्‍वर का पुत्र हूँ’ (यूहन्‍ना १०:३४-३६)।

यीशु मसीह ने उन लोगों के आरोप को इन्‍कार किया, उन्‍होंने वह आरोप को अपने चेलों को अपने साथ समावेश होने के लिये विस्‍तार किया। उन्‍हों ने भजनसंहिता ८२:६ को दोहराया मैने कहा था, ‘तुम ईश्‍वर हो, और सब के सब परमप्रधान के पुत्र हो।’ यह अनुच्‍छेद में ‘ईश्‍वर’ कह कर बहुवचन में बताया हुआ है। यीशु मसीह ने उसको धर्मशास्‍त्र को पूर्ण सहमति में प्रदर्शन किया, कि वे मात्र नहीं बल्‍कि उनके पीछे चलेने वाले सब अनुयायी भी परमेश्‍वर का सन्‍त होने का दाबा करने वाले है।

यीशु मसीह ने अपने जवाव को फरीसियों के आगे यह शब्‍दों में निरन्‍तरता दिया, ‘यदि मैं अपने पिता के काम नहीं करता, तो मेरा विश्‍वास न करो, परन्‍तु यदि मैं करता हूं, तो चाहे मेरा विश्‍वास न भी करो, परन्‍तु उन कामों का तो विश्‍वास करो ताकि तुम जानो और समझो कि पिता मुझमे है और मे पिता में हूं’ (यूहन्‍ना १०:३७-३८)।

आश्‍चर्य कामों के द्वारा यीशु मसीह ने परमेश्‍वर उनके पिता और वे परमेश्‍वर के पुत्र है इस चीज को दिखाया। यीशु मसीह ने अपने चेलों को अपने द्वारा किया हुआ कामों का बुलावट किया और सुसज्‍जित किया उन्‍हों ने कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो मुझ पर विश्‍वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूं वह भी करेगा, वरन इनसे भी बड़े काम करेगा, क्‍योंकि मैं पिता के पास जाता हूं” (यूहन्‍ना १४:१२)। यीशु मसीह परमेश्‍वर का पुत्र है प्रमाणित करने और आश्‍चर्य कामो के द्वारा ही उनके पीछे चलने वाले भी परमेश्‍वर का पुत्र है यह कह कर प्रमाणित करेंगे।

यीशु मसीह ने जोर देकर कहा, “अपने से मैं कुछ नहीं करता उनके में वास करने वाले पिता ने ही सभी चीजो को किया, क्‍या तू विश्‍वास नहीं करता कि मैं पिता में हूं, और पिता मुझ में हैं? ये वाते जो मैने तुमसे कहा हूं, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्‍तु पिता मुझ में रह कर अपने काम करता है” (यूहन्‍ना १४:१०)। यीशु मसीह ने अपने चेलों को आश्‍चर्य चकित करने वाले प्रतिज्ञा में कहा कि वे और पिता दोनो लोगों में वास करते हैं। यीशु मसीह ने उसको उत्तर दिया: “यदि कोही मुझ में प्रेम रखेगा, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस में प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आयेंगे और उसके साथ बास करेगें” (यूहन्‍ना १४:२३)। यीशु मसीह में वास करने वाला पिता हमारे अन्‍दर भी वास करेगा ।

यीशु मसीह ने कहा, “मै संसार की ज्‍योति हूँ।” दूसरे समय में यीशु मसीह ने अपने चेलों से कहा, “तुम जगत के ज्‍योति हो” उन्‍होंने अपने चेलों क छोड्‍ने से कुछ समय पहले यीशु मसीह ने मरियम मगदलिनि से कहा, “मूझे मत छु क्‍योंकि मैं अव तक पिता के पास नहीं गया, परन्‍तु मेरे भाइयों के पास जा कर उनसे कहदे, कि मैं अपने पिता और तुम्‍हारे पिता, और अपने परमेश्‍वर और तुम्‍हारे परमेश्‍वर के पास ऊपर जाता हूँ” (यूहन्‍ना २०:१७) ।

यीशु मसीह ने अपने चेलों को अपने से अन्‍य प्राणी और निचले दर्जा अथवा दूसरे तह के रूप में नहीं देखा, और न ही वे हम लोगों को तुच्‍छ प्राणी के रूप में देखते है। वे मरे ताकि उनके अन्‍दर वास करने वाली आत्‍मा आ कर हमारे बीच में वास करे और हम लोगों को एक बनाये। ‘मै हूं’ कहने वाली आत्‍मा हमारे अन्‍दर भी वास करती है। वही आत्‍मा से हम लोगों को परमेश्‍वर का सन्‍तान बनाती है।

पौलुस ने इस रहस्यर को कहा है “अर्थात उस भेद को जो युग-युग और पीढ़ियों से गुप्तन रहा, परन्तु अब उसके उन पवित्र लोगों पर प्रकट हुआ। जिन पर परमेश्वरर ने प्रकट करना चाहा कि उन्हे ज्ञात हो कि अन्यत जातियों में उस भेद कि महिमा का मूल्यि क्या् है, और वह यह है कि मसीह जो महिमा कि आशा है तुम से रहता है” (कुलुस्सिियो १:२६-२७)। पौलुस से पहले पुस्ताि से ले कर यह गुप्तं में रहने वाला रहस्य था और उस दिन से ले कर यह पुस्ताक तक दबा हुआ है। परन्तु२ अव उस समय जैसा ही परमेश्वहर ने अब अपने सन्‍तों को यह बात प्रकट किया है।

बहुत बर्षो के बाद यूहन्ना ने अपने ही लिखा, “देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है कि हम परमेश्वयर की सन्ता न कहलाएं, और हम है भी इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंमकि उसने उसे भी नहीं जाना” (१ यूहन्ना ३:१)। हम भी अपने बुलावट को उत्सुाकता के साथ देखें।

[इस विषय में अध्‍ययन करने के लिये इच्‍छा है तो कृपया 'मैं हूँ' (English I Am) कहलाने वाला लेख को देखिये।]

यीशु मसीह की आत्‍मा

हम यहेजकेल ने देखा हुआ दर्शन में और ज्‍यादे अथवा अत्‍यधिक बातों को पढ़ सकते है। उनके चेहरे ऐसे ही थे। उनके मुख और पंख ऊपर की ओर अलग-अलग थे, हर एक जीवधारियो के दो-दो पंख थे, जो एक दूसरे के पंखो से मिले हुए थे, और दो-दो पंखों से उनका शरीर ढका हुआ था। और वे सीधे अपने अपने सामने ही चलते थे, जिधर आत्‍मा जाना चाहता था, वे उधर ही जाते थे, और चलते समय मुड़ते नहीं थे। पौलुस ने भी दुरूस्‍त इसको यह शब्‍दों में दोहराया ‘इसलिये कि जितने लोग परमेश्‍वर के आत्‍मा के चलाए चलते है वे ही परमेश्‍वर के पुत्र है’ (रोमी ८:१४)।

हम लोग स्‍वभाव से राजाओं, नौकरों, अथवा देवताओं नहीं है। हम लोगों के साथ न तो शासन करने वाला शक्ति ही है और न तो सेवा करने वाला नम्रता ही है, हम लोग तुच्‍छ तथा परमेश्‍वर रहित साधारण मनुष्‍य से बढ़ कर कुछ योग्‍य का नहीं है। हम अपने बुद्धि, बल अथवा इच्‍छा शक्ति से वह कोई भी ऊपर में उल्‍लेख किया हुआ बात बन नहीं सकता।

ख्रीष्‍ट को आत्‍मा अर्थात यीशु मसीह का आत्‍मा महान परिवर्तन करने वाले है। यीशु मसीह भी अपने बल में कुछ नहीं कर सके। ‘पुत्र अपने से कुछ नहीं कर सकता’ और ‘मैं अपने से कुछ नहीं कर सकता।’ उन्‍होंने करने वाली सभी बातों को अपने पिता में बास करने वाले आत्‍मा मे पूर्ण रूप से भरोसा किया। उनमें होने वाला आत्‍मा अधिकार करने वाला राजा तथा आज्ञाकारी नौकर थे। वह आत्‍मा में सिद्ध मनुष्‍य और सिद्ध परमेश्‍वर थे।

वह आत्‍मा जो उनमें था अब हमारे में है, स्‍वभाविक मनुष्‍य के लिये जो असम्‍भव है वह परमेश्‍वर में सम्‍भव है। जिस आत्‍मा ने यीशु मसीह को राजा बनाया, वही आत्‍मा ने उनके शरीर के सदस्‍यों को भी राजा जैसा बनायेगा। यीशु मसीह को नौकर बनाने वाला आत्‍मा ने वहां के शरीर के सदस्‍यों को भी नौकर बनायेंगे। वही आत्‍मा जो यीशु मसीह में परमेश्‍वर था, उनके पीछे चलने वालों में भी वही परमेश्‍वर है। वही आत्‍मा के द्वारा वे लोग सिद्ध एकता और मिलाप में चलने वाले महिमित और संयूक्त शरीर बनेंगे। वही आत्‍मा द्वारा वे लोग परमेश्‍वर में एक हो जायेगे। आमिन!

इस पुस्तक मुद्रण के लिए रंगिन [Colour] फ़ाइल

इस पुस्तक मुद्रण के लिए श्‍याम-स्‍वेत [Black & White] फ़ाइल

कसरी छाप्ने‍

-->